श्री देवनारायण मन्दिर ट्रस्ट देवधाम जोधपुरिया में आपका स्वागत है |

भगवान श्री देवनारायण

भगवान श्री देवनारायण जी की जीवन कथा जो बगडावत महाभारत के नाम से प्रसिद्ध महाकाव्य है जिसमे मानव चरित्र के सम्पुर्ण दृष्टांत है बगडावत महाभारत विश्व का एकमात्र महाकाव्य है जो अलिखित रहा है तथा देवनारायण जी के भोपे पुजारियो )द्वारा गाया जाता रहा है अब यह महाकाव्य लिखित मे उपलब्ध है कथा के अनुसार बगडावत चौहानवंशीय गुर्जर थे जिनका सम्बन्ध सांभर और अजमेर राजपरिवार से है राजा अजैपाळ के पुत्र आद हुऐ आद के पुत्र जुगाद हुऐ जुगाद के पुत्र काजल, काजळ के पुत्र बिसळदेव माण्डळदेव आनादेव हुऐ माँडळदेव के हरिसिहँ रावत और हरिसिहं के पुत्र बाघ सिहँ हुऐ बाघ सिहँ की बारह पत्नियो से चौबिस पुत्र हुऐ जो चौबिस बगडावतो के रुप में प्रसिद्ध है जिनमे से सवाई भौज के पुत्र भगवान देवनारायण थे जिन्हें भगवान विष्णु के अवतार के रुप में पुजा जाता है चौबिस बगडावत बडे पराक्रमी वीर यौद्वा थे जो स्त्रियों का बडा सम्मान करते थे देवनारायण जी का जन्म माघ सुद्वि सप्तमी 968 माना जाता है जिसके अनुसार बगडावत राण के राजा दुर्जनशाल सिहँ के साथ हुए महायुध में 960 में वीरगति को प्राप्त हो गए थे परन्तु कई स्थान पर इतिहास में देवनारायण का जन्म 1243 में उपलब्ध होता है |

सवाई भौज का जन्म सम्वत 1110 के चैत्र मास की दौज के दिन माना है परन्तु मेरी समझ के अनुसार इतिहासकारो और साहित्यकारो ने इस दौहे का गलत अर्थ लगाया है मेरी समझ से यह दौहा सवाई भौज के गुणो और विशेषताओं को परिभाषित करता है जिसके अनुसार रुद्र (शिव )के समान प्रलयकारी सम्वत (समय )के समान गतिशील पुख (पुष्यनक्षत्र)के समान पवित्र और शुभ चान्दनो (चन्द्रमा के समान प्रत्येक मन को शीतलता प्रदान करने वाला मधुमास (चैत्रमाह )के समान प्रकृति को उत्कृष्टता प्रदान करने वाला ऐसे गुणो परिपुर्ण सवाई भौज इस संसार में एक मात्र है जिनसे श्रैष्ठ केवल ईश्वर है अर्थात इस प्रकार के गुणो वाला व्यक्ति इस संसार में सवाई भौज के अलावा अन्य कोई व्यक्ति नही है !बगडावत महाभारत कथा बडी रोमांचकारी है कथा मे प्रेम वात्सल्य हास्य व्यग्ंय वीर रस श्रृगांर रस भक्ति रस सम्पुर्ण सामंजस्य है स्त्री सम्मान इस कथा की विशेषता है |

बगडावत भगवान शिव के परम भक्त थे जिन्हें वरदान मे सोना का पौरसा मिला था अर्थात बारह बरस की माया और काया मिली बगडावत महादानी और विद्वानो और कलाकारो का सम्मान करने वाले थे जिन्हौने बजौरी नृतकी को नौ करोड का दान किया था गरीबो को धन लुटाने के लिए रोज घोडो के पैरो मे सोने की मौहरे बान्ध कर घोडे दौडाते थे बगडावतो ने जन कल्याण के लिए कुऐ बावडी और तालाब खुदवाऐ जिससे उनकी कीर्ति चारो दिशाओं में फेलने लगी बगडावत धन का महत्व दान और उपभोग में मानते थे |

सूचना पट्ट

घोषनाये और काम चालू हें

मंदिर ट्रस्ट ने जारी किया कैन्टीन का टेन्डर

मंदिर परिसर में अत्याधुनिक केंटिन एवं रसोई घर का निर्माण करना |

मंदिर प्रांगन में चिल्ड्रन पार्क की स्थापना करना |

मंदिर के पीछे माशी बांध पर महिलाओ और पुरषों हेतु पृथक-पृथक स्नान घरों का निर्माण करना |

अत्याधुनिक अतिथि भवन का निर्माण करना |

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में विकसित करना |

देवधाम जोधपुरिया को राज्य सरकार देवस्थान विभाग से पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाना |

देवधाम जोधपुरिया को राज्य सरकार देवस्थान विभाग से पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाना एवं आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में विकसित करना |

पात्रता ऑनलाइन आवेदन-२०१८

कक्षा १० और १२ में छात्र की ८५ प्रतिशत तथा छात्रा की ८० प्रतिशत होनी चाहिए

पूर्वस्नातक और स्नातकोत्तर में छात्र की ६५ प्रतिशत तथा छात्रा की ६० प्रतिशत होनी चाहिए

खेल-कूद में अंतरराष्ट्रीय और एन सी सी में सी प्रमाण पत्र ,स्काउट और गाइड राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित

गुर्जर गौरव में आईआईटी, एम्स, उच्च ग्रेड वेतन अधिकारी

शुभकामनाएं सन्देश